क्या बताए कैसे काटी तन्हाई हमने
कभी खा लिया कुछ
कभी पी लिया कुछ
कभी रो दिए टूटकर
कभी हँस दिए खुलकर
कभी ताकते रहे आसमान
कभी खो गए नैना
कभी सो लिए ज़रा
कभी जाग लिए ज़रा
कभी आया गुस्सा खुद पर
कभी इन तन्हाइयो पर
कभी देखे सपने
कभी खुद ही तोड़ दिए
सपने जो न हुए अपने
क्या बताए कैसे काटी तन्हाई

एक आम लड़की की तरह
नहीं है आज़ादी स्वप्न देखने की मुझे
और भी बहुत से दायतित्व है मेरे
समाज, देश और अपने परिवार के प्रति
अनेक फ़र्ज़ मुझे निभाने है
सिर्फ अपने बारे में तो नहीं सोच सकती
बहिन, बेटी, पत्नी, माँ
और भी कई रूप है मेरे
इन सबसे मुँह मोड़कर
कैसे मैं देखूं सपने
अपनी ज़िंदगी के
जो आम होते हुए भी खास है
खास होते हुए भी आम है

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