आज हमारे अमृतसर में एक दुखद हादसा हुआ ।
जिसने मुझे झिंझोड़ दिया।
दिल मे तड़प,आँखों में अश्रु, दिमाग में तूफान है ।
कौन उन घरों के नुकसान को पूरा कर पाएगा?
मन विचलित है। श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु तुच्छ शब्द पुष्प भेंट उन आत्माओं की शांति के लिए।

चीख-पुकार करती जनता।
पर राजा बिल्कुल मौन है।
और ह्रदय विदारक घटना
जिम्मेदार कहो कौन है?

सुविधा के कानून हैं सारे।
ताक पर रखे नियम बेचारे।
यही गल्ती जनता की हो तो
लिख दिए जाते लेख हैं कारे।
सरकारें तो अब बकमौन हैं ।
और ह्रदय विदारक घटना
जिम्मेदार कहो कौन है?

बच्चे कट गए माओं के ।
लुटे सिंदूर सधवाओं के ।
साथ खड़ों को नयन ढूंढते
रंग बिगड़ गए हवाओं के ।
इंसानियत भी अब गौण है।
और ह्रदय विदारक घटना
जिम्मेदार कहो कौन है?

– ।।मुक्ता शर्मा।।

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