अक्सर आपने देखा होगा कुछ लोग बहुत ही आसानी से अनजान लोगों से घुल मिल जाते हैं। खासकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते समय, वे पारंगत होते हैं किसी भी टॉपिक को पकड़ अपनी बात शुरू करने में।
आज दिल्ली मेट्रो में कुछ ऐसा ही देखा, लेकिन तथ्य ठेस पहुंचा सकते हैं आपको।
मेरे सामने वाली रो में 3 नार्थ ईस्ट के लड़के बैठे थे, ज्यादातर लोग अपने कान में डिब्बी लगाए अपने अपने फ़ोन को घूर रहे थे। मेरी नजर उन लड़कों पर इसलिए पड़ी की अभी अभी उन्होंने अपनी सीट एक वृद्ध महिला को आफर की थी, हालांकि महिला नही बैठी उन्हें अगले ही स्टेशन पर उतरना था। 18-20 वर्ष उम्र रही होगी| उन लड़कों की और इस उम्र के लोग सीट कम ही आफर करते हैं सो ध्यान जाना लाज़मी था। तभी श्याम वर्ण के एक उत्तर भारतीय सज्जन वहां आ कर बैठे। अभी मेट्रो का दरवाजा बंद ही हुआ था कि उन्होंने लड़को की तरफ देखते हुए अपना पहला सवाल दागा।
तुमको हिंदी आता?
उनमे से एक लड़के ने जवाब दिया।
हाँ जी।
दूसरा सवाल – थोड़ा थोड़ा आता?
फिर से उसी लड़के ने जवाब दिया।
बहुत अच्छे से आता है।
तीसरा सवाल – क्या करते हो दिल्ली में?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं।
चौथा सवाल – कौन से कंट्री से हो आप लोग?
ऐसा लग रहा था जैसे रैपिड फायर राउंड चल रहा है। लेकिन उन लड़कों ने संयम नही खोया और जवाब दिया।
हम लोग इंडियन हैं और सिक्किम से हैं।
जनाब इतने पर भी नही माने और बोलने लगे तुम लोग दिखने में नेपाली लगते हो, इंडियन नही लगते।
ऐसा सुन एक लड़के ने आपा खो दिया और पूछ बैठा, क्या आपको पता है भारत में “गंगटोक” कहाँ है?
जनाब ने हंसते हुए कहा “नहीं”
अब सवाल पूछने की बारी लड़को की थी।
दूसरे लड़के ने पूछा-आप कौन सी कंट्री से हो?
ये सुनते ही जनाब तमतमा गए और कहने लगे तुम मुझे देख कर और मेरी भाषा सुनकर समझ नही सकते कि मैं इंडियन हूँ?
एक लड़का बोला-नहीं, आप तो मुझे साउथ अफ्रीकन जैसे दिख रहे हो। और जहाँ तक भाषा की बात हमारी हिंदी आपसे बेहतर है।
जैसे को तैसा!
जनाब झेप गए, दूसरी तरफ मुँह घुमा लिया और बड़बड़ाने लगे, शक्ल तो नेपाली जैसी ही है ना।
अगर नज़रंदाज़ कर दें जैसा कि अक्सर लोग करते हैं तो ये कोई बड़ी बात नही मानी जायेगी।
जरा सोचिए आपके दिल पर क्या बीतेगी जब कोई आपको आपके ही देश में पूछे कि आप कौन से कंट्री से हैं? लोगों को अपने ही देश की जानकारी नही और बकवास करने का मौका नही चूकते।
NCERT के हर किताब के पहले पन्ने पर संविधान की प्रस्तावना लिखित है, लेकिन लगता नही की कभी किसी ने पलट के भी देखा है, मतलब समझना तो दूर की बात है।
लड़को की हाज़िर जवाबी से उस इंसान का मुंह तो बंद हो गया। लेकिन जरूरत है उस जैसे हर विकृत मानसिकता वालें लोगो तक संदेश पहुंचाने की।
पहले तोलो फिर बोलो।

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