मैंने पूछा कुदरत से
ठण्ड क्यों इतनी लगती है
क्यों घना है कोहरा
कंपकंपाती सर्द हवाएं
शरीर में क्यों चुभती है
कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर
ये प्रकृति का नियम बताया
मैंने पूछा कुदरत से
तुम इतनी निष्ठुर क्यों हो
गरीबो से इतनी खपा क्यों हो
जिनके पास नहीं है गर्म कपडे
कुछ उनके लिए नहीं सोचती क्यों हो

कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर

मेहनत का महत्व बताया
मैंने पूछा कुदरत से
क्यों बनायीं अमीर -गरीब की खाई
क्यों चलती भलाई के पीछे बुराई
क्यों होती है बाप के लिए बेटी पराई

कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर

ये जग का नियम बताया ——–

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *