प्रकृति का नियम

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प्रकृति का नियम

By |2018-10-23T23:35:59+00:00October 23rd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

मैंने पूछा कुदरत से
ठण्ड क्यों इतनी लगती है
क्यों घना है कोहरा
कंपकंपाती सर्द हवाएं
शरीर में क्यों चुभती है
कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर
ये प्रकृति का नियम बताया
मैंने पूछा कुदरत से
तुम इतनी निष्ठुर क्यों हो
गरीबो से इतनी खपा क्यों हो
जिनके पास नहीं है गर्म कपडे
कुछ उनके लिए नहीं सोचती क्यों हो

कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर

मेहनत का महत्व बताया
मैंने पूछा कुदरत से
क्यों बनायीं अमीर -गरीब की खाई
क्यों चलती भलाई के पीछे बुराई
क्यों होती है बाप के लिए बेटी पराई

कुदरत ने कुछ ना कहा
वक़्त थम सा गया
फिर उसने मुस्कराकर

ये जग का नियम बताया ——–

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