मियां बीबी की तकरार

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मियां बीबी की तकरार

By |2018-10-23T23:32:35+00:00October 23rd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

एक दिन बीबीजी यूँ गुस्से में आ गयी,
गलती सारी हमारे हिस्से में आ गयी|
ना जाने क्या क्या नहीं सुनना पड़ गया,
मन ही मन में सड़ना पड़ गया|
इतना भी नहीं आता क्या यही संस्कार हैं,
तुम्हारे साथ जीवन निरर्थक और नाकार है|
कोई काम तुमसे ढंग से करा नहीं जाता,
बहुत सह चुकी पर अब सहा नहीं जाता|
मेरी बात ना मानने का शौक पाल रखा है,
वो तो में ही हूँ जिसने तुम्हे संभाल रखा है|
उस दिन भी ये ही हुआ था जब मेरी सखी घर आयी थी,
तोते की तरह रटा रटा कर मैंने बात रटाई थी|
उससे दूर रहने की ही तो हिदायत दी थी,
पर आपने तो उससे बात तक नहीं की थी|
अपना सड़ा हुआ चेहरा ले के बैठे रहे थे,
जैसे उससे किसी बात से ऐंठे रहे थे|
थोड़ा बोल लेते तो क्या बुरा हो जाता,
कैसे समझाऊँ मुझे तो समझ ही नहीं आता|
फिर किसी दिन और सहेली से मेरी मुलाकात क्या हो गयी,
आपके चेहरे पे तो हंसी की बरसात हो गयी|
मानों कोई बिछुड़ी हुई प्रेमिका मिल गयी थी,
वो तो थी ही निरलज जो इतना घुलमिल गयी थी|
पर आपको तो बस मौके का फायदा ही उठाना था,
क्या बीत रही थी मुझ पर कभी जानना भी चाहा था|
छोड़ो तुम मुझे कभी समझ नहीं पाओगे,
जो छोड़ दिया मैंने तो उम्र भर पछताओगे|

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