जिंदगी के हादसे (ग़ज़ल)

जिंदगी के हादसे (ग़ज़ल)

हादसों से भरे इस जहान में,
जिंदगी जिन हालातों से गुज़रती है|

हर सु बेचैनी, तड़प और कई फिक्रें,
कब दो घडी सुकून से बैठती है|

क्या, कब, कैसे, क्यों, किसलिए?
ज़हन में सवालों की झड़ी रहती है|

पैरों तले ज़मीं नहीं, आसमा है दूर,
सहारा न मिले खुदा का तो रोती है|

एक हसीं खवाब जो हो गया बेवफा,
याद में जिसके मेरी रूह तड़पती है|

जिंदगी है बेमुरव्वत, और बेवजह,
लाश की तरह अनु इसे क्यों ढोती है?

No votes yet.
Please wait...

ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

Leave a Reply