शीशे के घर पर पत्थर न मारो

Home » शीशे के घर पर पत्थर न मारो

शीशे के घर पर पत्थर न मारो

By |2018-10-27T10:36:44+00:00October 27th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

नज्म

कभी आसमा को जमीं पर उतारो
के दहशत भरी ज़िन्दगी को संवारों |

महका चमन फूल खिलने लगे है
कभी मेरी नजरों में आओ नजारो||

शहादत हमारी सदा याद रखना
हलाते-ए वतन को पतन से उबारो|

हमे भूल जाओ कोई गम नही पर
वतन आन है भूल जाओ न प्यारों||

शहर है विराना आदमी गमजदा है
कभी गुल का दामन गुलिस्ताँ निखारों!

के मतिहीन कहा सच जमाने जो तुमसे
कभी शीशे के घर पर पत्थर न मारो||

मनोज उपाध्याय मतिहीन
कभी आसमा को जमीं पर उतारो
के दहशत भरी ज़िन्दगी को संवारों|

महका चमन फूल खिलने लगे है
कभी मेरी नजरों में आओ नजारो||

शहादत हमारी सदा याद रखना
हलाते-ए वतन को पतन से उबारो|

हमे भूल जाओ कोई गम नही पर
वतन आन है भूल जाओ न प्यारों||

शहर है विराना आदमी गमजदा है
कभी गुल का दामन गुलिस्ताँ निखारों!

के मतिहीन कहा सच जमाने जो तुमसे
कभी शीशे के घर पर पत्थर न मारो||

– मनोज उपाध्याय मतिहीन

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

Leave A Comment