माजरा क्या है जरा हाल पता चल जाये
कैसे गुजरा है उनका साल पता चल जाये!

यूं तो खुशहाल ही दिखते है दिखने के लिए
मचा अंदर है क्या बवाल पता चल जाये!!

ओ जो मुस्कान दिखाते हैं दिल में जलते है
सुलग रहा है क्या भूचाल पता चल जाये!

हामी भरते है हर एक बात में सहमते है ओ
उनके जेहन में क्या सवाल पता चल जाये!!

हमे तो लगता है मतिहीन मुहब्बत है उन्हें
दिल के उनके जरा खयाल पता चल जाये !

ऐसे तो छपती है गजले मेरी किताबों में बहुत
आज क्या कह रहा रिसाल पता चल जाये!!

– मनोज उपाध्याय मतिहीन

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