वाह रे क्रिकेट

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वाह रे क्रिकेट

By |2018-10-30T10:18:04+00:00October 30th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

वाह रे क्रिकेट तू अनूठा, तेरा खेल बड़ा अजीब,
तुझको खेले हर कोई जन, चाहें अमीर और गरीब |
कभी दिन में, तो कभी दूधिया रात में तू खेला जाता,
कभी चौका तो कभी छक्का, बॉल को खूब पेला जाता |
बॉलर भी देखें ऐसे, जैसे फूले हुए हों सीने,
उन्हें देख के, बल्लेबाज़ के छूटें फिर पसीने |  
सभी खिलाडी बॉलों की करते ऐसे निगरानी,
हाथों से न छूट जाये, बल्लेबाज भर जाएँ पानी |
विकेटकीपर का भी होता बड़ा अजब लिबास,
हर तरफ से बॉल लपके, जैसे मानो वो हो बाज़ |
हर एक पल का जायजा रखे, दस्तानों से करे प्रहार,
फिर भी चतुर बल्लेबाज, रन चुराएं बारम्बार |
अंपायर का भी खूब अनोखा होता अंदाज,
भिन्न भिन्न इशारों से, करते बयां अपने भाव |
कमेंटेटर्स भी कुछ कम नहीं, बड़ी जबर है ये हस्ती, 
हर पल को बखान करें, लेते चुटकी करते मस्ती |

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