वो पल ऐसा था जो गुज़र गया
अपने वादे से वो सफा मुकर गया,

उसकी आदत है भटकने की
मैं इधर गया तो वो उधर गया,

तारों की ख़ुशी कुछ पल की
अमावस के दर्द से चाँद उभर गया,

अब चिठ्ठी कागज़ को भूल जाओ
इस तूफान में वो कबूतर गया,

आज़ाद अब गिलासों से दूर है
सरीफों से कहो मैं सुधर गया।।

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