अनजान डगर

अनजान डगर

आंखो मे नींद नही आज
न जाने कितने सवाल हे,
पता है नही है कोई आने वाला
फिर भी न जाने किसकी तलाश है…

भटक रहा हुं मैं
मंजिल तेरी तलाश मे,
सुनी है मेरी डगर सारी
ना जाने राहे करती किसका इंतजार हे…

बैचेन हे दिल भी मेरा
सांसे भी लगती शमशान है,
ना जाने क्यो घुट रहा ये जीवन
किस्मत की कलम भी शांत है

चन्द शब्द ही लिख दे खुदा
इस बेजान किताब मे,
रंग दे इसे काली स्याही से ही
छोड ना देना इसे कोरे मुकाम पे….

– Deepak_UD

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