गोलगप्पन की कहानी अजब बड़ी है प्यारी,
देखत ही लाइन लगावें चाहें नर हो या नारी|
चाहें नर हो या नारी सभी के मन मैं लडडू फूटें,
लैके दौना हाथ मैं फिर भर भर ठूसें|
कोई खावे सौंठ के साथ कुछ चटनी के लेवें,
दौना भर कै पानी पियें फिर सूखी पापड़ी लेवें|
गिनती करत हैं जैसे एकउ छूट ना जावे,
एक गोलगप्पे के लिए फिर लम्बी बहस छिड़ जावे|

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