भारत में गरीबी

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भारत में गरीबी

By |2018-11-16T00:28:42+00:00November 16th, 2018|Categories: आलेख|Tags: , , |0 Comments

इतिहास के लिखित सबूतों से ज्ञात हुआ है कि हमारा देश प्राचीन काल में सोने की चिडिया की तरह था चाहे राम राज्य की बात करें या फिर कृष्ण राज्य की या फिर प्राचीन आर्यों के राज्य की।
उन सभी के राज्य में एक ऐसा प्रशासन था जो सिर्फ प्रजा के लिये ही जीता था लेकिन जब इन राजतंत्रो का अंत हुआ होगा तब कहीं न कहीं मानवीय क्रियाकलापों के द्वारा ही उनका अंत हुआ होगा यहाँ मेरा कहना अतिशयोक्ति होगा कि कितना भी अच्छा शासन या प्रशासन हो वहां पर कोई न कोई कुशासन की छत्रछाया जरूर होती है क्योकि रामायण काल से बिदित है कि कलयुग का स्थान राजतंत्र के पद पर दिया गया है और वही कलयुग मानव सभ्यता का विनाशकारी हुआ होगा।
हमारे देश में राजतंत्र को परवर्तित करके लोकतंत्र की स्थापना की गई है जहाँ पर सिर्फ “जनता का, जनता के द्वारा, जनता का शासन की बात कही गयी है लेकिन जनता को ये सभी अधिकार पूर्ण रूप से मिले नही है जिस दिन जनता को ये सभी अधिकार पूर्ण रूप प्राप्त हो जायेगें उस दिन से लोकतंत्र का सच्चा अर्थ समझ आयेगा।
यहाँ सरकार भी जनता को उनके सभी अधिकार देने का प्रयास करती है लेकिन जनता बिना कर्त्तव्य किये अधिकार चाहती है और ऐसा संभव ही नहीं है इसलिये लोकतंत्र को मजबूत करने के लिये सरकार और जनता को बैलेन्स बनाकर चलना चाहिये ताकि दोनो तरफ का वजन बराबर रहे।
उदाहरण के लिये-सरकार किसी गाँव में सड़क का निर्माण करवा देती है और इस सडक के द्वारा गाँव वालों को आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगती है लेकिन उसी सडक से गाँव के कुछ पूँजी पति लोग नदी से अवैध खनन करके उसी सडक से अवैध माल ले जाने लगते है जिससे सडक पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है और फिर से गाँव की आर्थिक स्थिति कमजोर तो होती ही है साथ साथ उस सडक से चलना मुश्किल पड जाता है क्योकि उस गाँव की जनता अपने कर्तव्यों भूलकर अपने अधिकारों की की ज्यादा लालसा रखने लगी थी
तो जनता को चाहिये कि यदि उसे पूर्ण रूप से अपने अधिकार चाहिये तो सबसे पहले अपने कर्तव्यो को सच्चाई से निभाए, ऐसा करने से अधिकार तो अपने आप प्राप्त हो जायेगें।
तभी तो देश में आज भी चारो तरफ गरीबी घुसी हुई है एक तरफ जहां शिक्षा एवं जागरूकता की कमी तथा दूसरी तरफ जनता की कमजोरी का फायदा उठाकर प्रशासन भी भ्रष्ट होता जा रहा है।
इन्हीं कारणों से अशिक्षित गाँव के लोग गरीब के गरीब ही बने रहते हैं क्योंकि इन लोगों को न तो कानून की जानकार होती है और न ही प्रशासन की जानकारी इसलिये अपनी सारी की सारी कमाई भ्रष्ट अधिकारियों की जेब भरने में ही लगा देते है जिससे भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ और भी लम्बे होने जाते है और अंत में यहीं से कुप्रशासन की नींव पडना शुरू हो जाती है।
हमारे देश में चाहे कानून की धारा हो या फिर संविधान के नियम ये सभी प्रबंधन देश की जनता के हित की लिये ही बनाये गये है लेकिन इन नियमों को अमल करने के लिये सबसे पहले जनता को जागरूक होना जरूरी है जब तक जनता को नियम तथा कानून की सारी जानकारी नहीं होगी तब तक कानून प्रबंधक या कानून लागू करने वाले अपनी मनमानी करके जनता पर कानून जबरदस्ती थोपेते रहेगे जिससे जनता को अपने हितों के लिये कठिन से कठिन संघर्ष करना पडता है।
आज हम गाँव के लोग पुलिस तथा कचहरी के नाम से ही थर थर कांपते हैं क्यों कि आजका पुलिस प्रशासन पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका है और जहाँ कचहरी में न्याय की उम्मीद जताई जाती है वहां पर भी भ्रष्टाचार अपने चारो पैर जमा लिये हैं इसलिये कई वर्षों के मामलो का अभी तक भी निर्णय नहीं हो पा रहा है और तारीख पे तारीख देकर जनता से सिर्फ पैसा ऐंठने का काम होता है इसलिये गाव के लोग गरीबी से कैसे उबर सकते है
एक तो गाँव के लोगो के पास पूरे वर्ष काम भी नहीं मिलता तथा दूसरी तरफ उनकी थोडी बहुत बची पूँजी भी प्रशासन बहाना बनाकर ले लेता है तो गरीबी कहाँ जाये गी।
हमें गरीबी से पूर्णतया निपटने के लिये सबसे पहले जनता को जागरूक करने की कोशिश करनी चाहिये यदि यह कोशिश सफल हो जाती है तो जनता अपने कार्यों का पुनर्परीछण करने लगेगी जिससे जनता को मिलने वाले सभी अधिकार मिलने लगेंगे दूसरी तरफ प्रशासन को भी जागरूकता की जरूरत है यदि उन अधिकारियों में थोडी सी भी जागरूकता होती तो वे इस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होते और जनता भी कभी इतनी गरीबी के पास नहीं पहुँचती।
सरकार को भी सभी कानूनों तथा नियमों की जानकारी जनता तक पहुचाना चाहिये जिससे जनता को सभी तरह की जानकारी मिले ऐसे हितकारी कार्य करने से ही तो गरीबी दूर होगी वरना कितनी भी योजनायें लाओ इन योजनाओं का गरीब जनता पर कोई प्रभाव नहीं पडता और देश की ग्रोथ रेट पर भी काफी बुरा प्रभाव नजर आता है देश की स्थिति भी पीछे चली जाती है।

– ओम नारायण कर्णधार

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