बाल दिवस आया रे,
सब बच्चों को भाया रे|
बच्चे भागें चारों ओर,
बहुत मचाएं देखो शोर|
बचपन होता प्यारा प्यारा,
आनंद देता ढेर सारा|
कोई खेलता गुड्डा गुड़िया, तो कोई खेले चोर सिपाही|
कुछ को भाते खेल खिलोने, तो कुछ को मोटरगाड़ी भायी|
कभी खिलखिलाना,कभी इतराना, कभी शरारत करें भरपूर,
भागम भाग, गिरना पड़ना, कभी हो जाते थक के चूर|
कागज़ की नावें चल जाती, हर छोटी सी बारिश में|
छप छप करके छींटे उछालें, होती मस्ती आपस में|
कभी बिलखना सड़कों पे, तो कभी बन जाते जबर जिद्दी|
कभी मनवाते पापा से, तो कभी हो जाते मां से कुट्टी|
छीना छपटी, धक्कम धक्का, बाल बहनों के खीचें भाई,
ऐसे बाल दिवस की देते दिल से हम सब बधाई|

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