हम हैं नन्हें मुन्ने बच्चे
जितने अच्छे उतने सच्चे।
घर के अंदर हो या बाहर
शैतानी में सबसे अच्छे।

गुल्ली डंडा गेंद बैट से
दिनभर करते हम व्यायाम।
नहीं भूख की चिन्ता रहती
क्योकि बाग में पकते आम।
बना के टोली जहाँ से जाते
वहां के उड जाते परखच्चे ।
हम हैं नन्हें मुन्ने बच्चे।
जितने सच्चे उतने अच्छे।

ठंडी गर्मी या हो बरसात।
रहते अपनी टोली के साथ।
अगर अचानक घटना होती
सबके हाथ में सबका हाथ।
बचपन के भी जितने पल हैं
उनसे खिल जाते गुल लच्छे।
हम हैं नन्हें मुन्ने बच्चे ।
जितने सच्चे उतने अच्छे ।

– ओम नारायण कर्णधार

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