लोगों के ख़्वाबों का खरीदार है वो

सीधा सादा न ही वफ़ादार है वो

दुनिया मासूम उसको कहती ही रही

वो तो क़ातिल भी इक गुनहगार है वो

-डॉ आनन्द किशोर

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