झूठी अकड़

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झूठी अकड़

By |2018-11-30T11:59:31+00:00November 30th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

साहब इतनी भी अकड़ अच्छी नहीं होती,
झूठे रिश्तों की पकड़ सच्ची नहीं होती|

बस चंद पलों की मेहमान होती है,
ये तो बिलकुल बेईमान होती है|

हवा में उड़ने से कुछ हासिल नही होगा,
तेरे ग़मों में कोई शामिल नहीं होगा|

दुनिया में आएं हैं, तो प्रेम से रहिये,
बैर, जलन, ईर्ष्या, दूर इनसे रहिये|

मिलबांट के चलोगे तो, हर जन साथ निभाएंगे,
करेंगे तारीफें आपकी, औरों को भी बताएँगे|

दौलत, ओहदा और दिखावा, सब यहीं रह जायेगा,
ख़ाली हाथ आया जमीं पे, हाथ पसारे चला जायेगा|

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