मिलते ऐसे भी लोग

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मिलते ऐसे भी लोग

By |2018-11-25T23:43:24+00:00November 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|
आत्म दाह कर जाते हैं, सदन गैर जलाने को|
हैं अनभिज्ञ इस राज से, खिलते कमल को मिल जाता कीचड़ का सहयोग|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

अपने मुँह मियाँ मिट्ठू, रखते बनने का शौक|
है कर्म-निरसता प्रिय जिन्हें, कर्मठ पर ढाते रोब|
हैं कर्तव्य-पथ पर अग्रसर जो करते उनका विरोध|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

हमदर्दी का ढोंग रचाते, रखते दिल में छल|
कपटी मित्रता निभाने का करते कोशिश पुरजोर|
पलक झपकते कर देते संगमीत का लुटिया गोल|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

निज दोष विलोपन करते, पर छवि बदनाम|
मिथ्यावादिता से अलंकृत हो बन जाते आप महान|
जलनशीलता का इनको लग जाता है रोग|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

हैं पराये कंधे बन्दूक चलाने में माहिर|
पर सच्चाई ये कि, हैं अव्वल दर्जे के काहिल|
स्वार्थ हित मे अपनो का भी गाला दबाते लोग|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

हैं इनकी सारी करतूतें हो जाते नाकाम|
कर्मवीर को हीं मिलता है कर्मठता का प्रमाण|
होगी बुराई की चित चाहे जितनी डाले रोक|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

प्रेम सुधा जब बरसेगी नफरत होगी खाक|
सच्चाई के आगे नतमस्तक होंगे आप|
कुंठित ही रह जायेगी चापलूसी की नोक|
जीवन के सफर में मिलते ऐसे भी लोग|

– चंदन कुमार,
आत्मज वेद प्रकाश शर्मा,

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Chandan Kumar S/o Ved Prakash Sharma Vill-Chhoti Kopa P.O+P.S-Naubatpur Distt-Patna(Bihar) Pin Code-801109 Mobile number 8294501550

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