राजनीतिक काँटे

Home » राजनीतिक काँटे

राजनीतिक काँटे

By |2018-11-30T11:50:11+00:00November 30th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

सिंक गई रोटी राजनीति के काँटे की|
छिड़वा दी जंग एक खेत के दो मुल्ली में|
बस कहा, तू इस पांते की-तू उस पांते की|

हैं एक मृदा में पनपे हम|
विद्वेष रसायन किसने घोली|
भाईचारे के बीच में क्या जरूरत है नफरत की?
सिंक गई रोटी राजनीति के काँटे की|

है राजनीति बिन कंधे की|
वजह यही, लेता सहारा दंगे की|
है जरूरतमंद! कभी इस कंधे की,
कभी उस कंधे की|
सिंक गई रोटी राजनीति के काँटे की|

है दक्षता खड्डा खोदने की|
बखूबी आती कला इन्हें,
समाज बांटने की|
फिर देते क्यूँ मिथ्या-दिलाशा,
स्वनिर्मित-खाई पाटने की|
सिंक गई रोटी राजनीति के काँटे की|

न रहे वो लाल जिन्होंने मिट्टी पे कुर्बानी दी|
नवचेतना लाने में ताउम्र न्योछावर तन-मन की|
अब ठहरे वतन-घात, धोखाधड़ी व घोटालेबाज़|
पुजारी हैं ये! समाजवाद की आड़ में अलगाववाद की नीति की|
सिंक गई रोटी राजनीति के काँटे की|

– चंदन कुमार,
आत्मज वेद प्रकाश शर्मा

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Chandan Kumar S/o Ved Prakash Sharma Vill-Chhoti Kopa P.O+P.S-Naubatpur Distt-Patna(Bihar) Pin Code-801109 Mobile number 8294501550

Leave A Comment