यूं ही नहीं फलते फूलते रिश्ते आसान नहीं होता,
रिश्तों को बचाए रखना
रिश्तों को भी चाहिए,
जीवित रहने के लिए
प्रेम रूपी खाद,
और आपसी संवाद ,
संवेदनाओं का अहसास ,
दिल भी हो आसपास ,
कर्तव्यों को लेकर हाथ,
धैर्य का न छोड़ो साथ।
और बचना होगा
अधिकारों की चाहत से,
गलतफहमियों के जहर से,
बिखर सकते हैं अहंकार से,
और मर भी सकते हैं,
अधैर्य,क्रोध की तपन से
या शीतयुद्ध(चुप्पी) के कहर से।
क्योंकि रिश्ते भी परवाह (देखभाल) चाहते हैं।
prevention is better than cure.

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