यारो मैं भी आज बाप बन गया|
अपने पिता के त्याग का एहसास हो गया|

थे कितने मूढ़ हम जो जिद अपनी उनसे मनवाते रहे|
गर लगी डाँट तो मूँह रंग-बिरंगे बनाते रहे|
हमे अपनी गलती का आभास हो गया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया|

न पड़ती मार डंडे की,
रह जाते उदंड यूँही|
लड़खड़ाते पैर को संभालना सिखा दिया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया| 

देखा था फटेहाल कपड़ो में उन्हें|
हमे तो खूबसूरत पोशाकों का बादशाह बना दिया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया|

छोड़ी नही कसर कोई भी,
हमे जमीं से आसमाँ तक लाने में|
अपने अरमानो का गला दबा दिया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया|

थी बस! हमारी हीं फिक्र उन्हें|
हमारी खुशियों पर सर्वस्व वार दिया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया|

है वक्त अब उनके ख्याल रखने का|
अपना ठीक वही सिला होगा
क्योंकि हमारा भी नकलची संतान हो गया|
यारो मैं भी आज बाप बन गया”|       

– चंदन कुमार,
आत्मज वेद प्रकाश शर्मा

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