बड़े गर्व से कहते हैं
२१ बी सदी में जी रहे हैं
विकास के नए सोपान चढ़ रहे हैं
नारी सशक्तिकरण मना रहे हैं
पर नारी आज भी वही नारी है
जो जानती है सिर्फ
जीना दूसरो की ख़ुशी के लिए
हसना दुसरो की ख़ुशी के लिए
वो एक लड़की है
यह एहसास उसे शुरू से ही कराया जाता
त्याग बलिदान शब्द उसके लिए ही बने है
देना और कुछ न लेना ही सिखाया जाता उन्हें
एक नहीं दो घर की इज़्ज़त बढाती लड़कियां
राष्ट्र की नींव होती है लड़कियां
कभी फूल कभी तलवार की धार होती लड़कियां
सब कुछ उन्ही से दुनिया में
पर उनका कुछ नहीं अपना इस दुनिया में
कितनी भोली होती है लड़किया
बस ज़रा सा प्यार और दो बोल प्रसंसा के लिए
दिन-रात खटती हैं लड़कियां
खुद मिटती हैं औरो को सॅवारती हैं लड़कियां
कुछ नहीं चाहती कुछ नहीं कहती
क्युकी वो एक लड़की है
कुछ बोलने से पहले उसे सोचना पड़ता है
कुछ करने से पहले उसे सोचना पड़ता है
मन में उठी उमंगो को रोकना पड़ता है
क्युकी वो एक लड़की है
नहीं कर सकती अपनों का विरोध
नहीं कह सकती अपनी बात
घर को जोड़ना उसका फ़र्ज़ है
उसकी ख़ुशी हम पर क़र्ज़ है
क्युकी वो एक लड़की है
कुछ भी कर सकती है
सहनशीलता उसमे अपार है
त्याग दया ममता प्यार है
क्युकी वो एक लड़की है
सिर्फ प्यार ही तो चाहती है
अपना एक आसमान चाहती है
सपनो के पर लगाकर उड़ना चाहती है
क्योकि वो एक लड़की है
उसकी उड़ान सीमित है
उसकी खुशियां सिमित है
लेकिन उसके सपने उसकी सोच असीमित है
उसे किसी के सहारे की नहीं
किसी अपने की साथ की ज़रूरत है
क्योकि वो एक लड़की है

No votes yet.
Please wait...