आज निंदिया मन मे विचार कर गयी…
जब होम बच्चे थे,
तो माँ गोद मे हमे सुलाती थी,
कभी करती गुदगुदी, कभी कहानी
तो कभी लोरीया सुनाती थी,

बडे होकर हम बहुत पछताते हे,
चाहे कितने भी सोफ्ट गद्दे और तकीये रख ले,
वो गोद वाली नींद कहा हम पाते हे,
आँखो की वो बेला हमसे तकरार कर गयी,
आज निंदिया मन मे विचार गयी…

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