जी हाँ में जीरो मात्र ही हूँ

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जी हाँ में जीरो मात्र ही हूँ

By |2018-12-04T13:12:08+00:00December 4th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

जी हाँ में जीरो मात्र ही हूँ,
एक उपहास का पात्र ही हूँ|
माना अकेले में मेरा महत्व जीरो ही है,
लेकिन मेरे साथ से सब बनते हीरो ही है|
एक के आगे लगने से फिर यूँ दस बन जाता है,
उस एक के साथ जुड़ने से जीरो फिर हीरो बन जाता है|
साथ जुड़ने में सदा आती खुशहाली है,
अलग अलग रहने में लगती बदहाली है|

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