यार की प्रीत

यार की प्रीत

यार की प्रीत

ऐ दोस्त मेरे आ…भी जा…
के तेरे बिन ज़िन्दगी अधूरी है
खून के रिश्तों से जो न्यारी है
वो दिल का रिश्ता यारी है

बिना यार के मेरे दिलदार के
दिल भी सूना, दिन भी सूना
रात भी सूनी, दिल की हर बात भी सूनी
रातों दिन हर पहर ये दिल एक बना नमूना
ऐ दोस्त मेरे…..
जिद का पिंजड़ा तोड़ के
शब्दों की हर गफलत छोड़ के
बनके मन का मीत
दिल से दिल जोड़ दे
इस दिल पे सजा के अपनी प्रीत
सूने इस गीत को, तू दे संगीत
आ भी जा….
के तेरे बिन मेरी ज़िन्दगी अधूरी है
ऐ दोस्त मेरे आ…भी जा…
के तेरे बिन मेरी ज़िन्दगी अधूरी है।
सारे रिश्तों से जो न्यारी है
वो दिल का रिश्ता यारी है

कोयल सी बोली तेरी मयूर जैसा प्यारा
हिरनी सी चंचल अदाएं, दरिया सा गहरा मन
तू है बहती नदी सा मैं खाली सागर सा
तू लगे वर्षा सावन सी मैं प्यासा चातक सा
मेरे प्रीत के आँगन में तू प्रेम की वर्षा
बनके बरस जा तू प्रीत(सावन) की बरखा
हो जाऊं निहाल मैं प्यासा चातक सा
के आ भी जा…
हो… तेरे बिन ये ज़िन्दगी अधूरी है
ऐ दोस्त मेरे आ…भी जा…
के तेरे बिन मेरी ज़िन्दगी अधूरी है।।

– सुबोध उर्फ़ सुभाष

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