कृष्ण कहूँ,मोहन कहूँ, या बोलूं बांकेबिहारी,
हर रूप में कान्हा दिखे हैं, संग विराजे राधा प्यारी |
पीके प्याला तेरे ज़हर का, मैं भी मीरा बन जाऊँगा,
रज में मिला दे वृन्दावन की, में भी हीरा बन जाऊँगा |
कुंज कुंज में गाता फिरूंगा, महिमा तेरे नाम की,
किसी में होगा माखनवाला, किसी में राधेश्याम की |
आधा दीवाना बन चुका हूँ, थोड़ा बनना बाकी है,
तेरे नशे में पागल हूँ, अब कान्हा ही मेरा साकी है |
छोड़ चुका में मोह माया, पर तेरा मोह में छोडूं कैसे,
मेरे अन्दर श्याम बसे हैं, किसी और को अब जोड़ूँ कैसे |

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