देश के जवान

देश के जवान

सच्चे हीरो से कम नही है हम
कदम मेरे सिर्फ वतन के वास्ते उठते हैं
मेरी फिदरत है मैं समूह में रहता हूं
ये कविता देश के जवान के नाम!

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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