भरोसा रख

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भरोसा रख

By |2019-01-04T16:55:43+00:00January 4th, 2019|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

भरोसा रख क्यों मायूस हुआ जाता है,
अपनी आँखों मैं अश्क़ क्यों उतार लाता है|
जिंदगी के फ़लसफ़े को पहचान जा प्यारे,
दुखों के बाद ही सुखी होने का मज़ा आता है|

भरोसा रख ये दुःख की घटा भी छंट जाएगी,
कामयाबी खुद तेरे कदम चूमने आएगी|
असफलता और हताशा से ना घबराना तू कभी,
देख की तेरी लगन वो भी राह से हट जाएगी|

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