रात गहरा गयी थी, हल्की सी आहट हुई, सुनते ही उसने आँखें खोल दीं, उसके कानों में माँ के कहे शब्द गूँज रहे थे,
“सफ़ेद कॉलर और कफ़ वाले लाल कोट के साथ चमड़े की काली बेल्ट और बूट पहने सफ़ेद दाढ़ी वाला सांता क्लॉज़ आकर तेरे लिये आज उपहार ज़रूर लायेगा।”

रात को सोते समय उसके द्वारा दवाई के लिए आनाकानी करने पर माँ के यह कहते ही उसकी नज़र अलमारी में टंगे अपने पिता के लाल कोट की तरफ चली गयी थी, जिसे माँ ने आज ही साफ़ किया था और उसने ठान लिया कि वह रात को सोएगी नहीं, उसे यह जानना था कि सांता क्लॉज़ उसके पिता ही हैं अथवा कोई और?

“अगर पापा होंगे तो पता चल जायेगा कि पापा सच बोलते हैं कि झूठ, उनके पास रूपये हैं कि नहीं?” यही सोचते-सोचते उसकी आँख लग गयी थी, लेकिन आहट होते ही नींद खुल गयी।

उसने देखा, उसके तकिये के पास कुछ खिलौने और एक केक रखा हुआ है। वह तब मुस्कुरा उठी, जब यह भी उसने देखा कि उसके पिता ही दबे क़दमों से कमरे से बाहर जा रहे थे, लेकिन जैसी उसे उम्मीद थी, उन्होंने सांता क्लॉज़ जैसे अपना लाल कोट नहीं पहना हुआ था।

सहसा उसकी नज़र खुली हुई अलमारी पर पड़ी, और वह चौंक उठी, उसके पिता का लाल कोट तो उसमें भी नहीं था।

वास्तव में, लाल कोट अपना रूप बदलकर खिलौने और केक बन चुका था।

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *