यादें मोहब्बत की
जो तुम समझोगे मेरे आंसुओ का सबब
खुद के आँसुओं को तुम छुपा न सकोगे
करोगे जो मोहब्बत तुम रूह से मेरी
मेरे दिलों की धडकनों को समझ पाओगे
चेहरे की हँसी देखी दुनिया की भीड़ ने
दिल की गहराइयों से जो देखोगे तुम….
तड़पता हुआ खुद के लिए, हमें पाओगे
जो तुम समझोगे मेरे आंसुओ का सबब
खुद के आँसुओं को तुम छुपा न सकोगे

था मैं अधूरा कितना तेरे बिन
मेरे जाने के बाद तुम समझ पाओगे
रह जाओगे तुम भी अधूरे बिन मेरे
पल भर मेरी मोहब्बत को तरस जाओगे
होगी महफ़िल सजी लेकिन
खुद को तनहा पाओगे
जो तुम समझोगे मेरे आंसुओ का सबब
खुद के आँसुओं को तुम छुपा न सकोगे

महसूस होगी कमी एक कंधे की
चाहोगे रोना दिल खोल के
तुम चाह के भी रो नहीं पाओगे
समझोगे हर दर्द का सबब
खुद को तडपता तन्हा जो पाओगे
समझाना जो चाहोगे दिल की लगी
चाह के भी कुछ कह न सकोगे
जो तुम समझोगे मेरे आंसुओ का सबब
खुद के आँसुओं को तुम छुपा न सकोगे

इत्तेफाक से जो तुम मिले राह में
मेरी चाहतो को याद करके तड़प जाओगे
समझोगे मेरी चाहतों को तुम भी पर
दर्द की कश्मकश तुम जता न सकोगे
बहुत कुछ कहना भी चाहोगे पर कह न सकोगे
दर्द बनके आँसू छलकेंगे जो आँखों से
आँसुओं को छुपाना जो चाहोगे
तुम छुपा न सकोगे
जो तुम समझोगे मेरे आंसुओ का सबब
खुद के आँसुओं को तुम छुपा न सकोगे।।

– सुबोध उर्फ़ सुभाष

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