नया साल, नई आदतें, नया अंदाज़, नई सोच, आओ एक सकारात्मकता के साथ करें, गए साल को विदा, और नए साल 2019 का स्वागत !!! नई शताब्दी शुरू हुए पूरे 18 साल गुजर चुके हैं। और यह सदी भी अब 18 साल की हो चुकी है, पूर्ण युवा जोश से लबरेज। कभी सोचा है आपने, पूरा वर्ष महज एक कैलेंडर है, जिसके हर महीने पन्ने फाड़ते जाइए, या इससे कुछ इतर। तारीख, दिन, महीने, साल गुजरते जाएंगे, बस कुछ तस्वीरें हैं जो छाप छोड़ जाती हैं।
एक शायर अमीरुल्लाह तस्लीम की यह पंक्तियां सोचने पर विवश करती हैं।
सुबह होती है, शाम होती है। उम्र यूं ही तमाम होती है।
वक्त का पहिया अपनी चाल से चलता ही रहता है, कब एक साल निकल जाता है पता भी नहीं चलता, पर उनका मूल्यांकन करना, हमने क्या खोया, क्या पाया महत्वपूर्ण है। जीवन में देखा जाए तो बहुत कुछ अनचाहा भी हो जाता है, उसके लिए अपने दिमाग की सफाई जरूरी है। हम सब में बस यही कमी है, अगर कोई बात हो गई है तो बस उसे गांठ बांध कर रखेंगे। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध ले, रात गई बात गई!यह सोच बहुत अच्छी है, जब हम (नेगेटिविटी) नकारात्मकता को अपने दिमाग से निकाल देंगे, तभी शायद हम कुछ सकारात्मक या नया कर पाएंगे। बीत गए उस भूल जाना, नए साल को गले लगाना। बीते हुए लम्हों की कसक को लेकर कब तक जिएंगे, आशावादी रहिए कभी मुलाकात तो होगी, चाहे ख्वाबों में ही सही। एक और बात, सच को कहने, स्वीकारने से कभी मत डरिए। लोगों से डरडर कर क्या जीना, डरना है, तो गलत कामों और उसके अंजाम से डरिए। ईश्वर ने सभी को किसी न किसी विशेष कार्य हेतु भेजा है, उस पूरा करने का प्रयास करेंगे तो सार्थक है, अन्यथा जिंदगी तो सभी काटते हैं।
कवि दुष्यंत की ये पंक्तियां बहुत कुछ बयां कर रही हैं।
हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो रोकर कहने की आदत नहीं रही कभी।
आपकी बोल्डनेस, जीने का अंदाज़ शायद कई लोगों को पसंद ना आए, क्योंकि दुनिया तरस तो खा सकती है लेकिन, सच्चाई, साफ गोई को बर्दाश्त नहीं कर सकती। क्यों रहें गिड़गिड़ाते हुए। नई सदी के बाली उमर के युवाओं को भी आगे बढ़ते रहने के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं। अपने जोश और जज्बे के साथ होश ना खोएं। क्योंकि युवा पीढ़ी होश खोने की अंधीदौड़ में प्रवेश करने को बेताब रहती है। ये जो जीवन मिला है, उसमें से एक और वर्ष कम हो गया।आओ कुछ तो ऐसा कर जाएं, कि हस्ती कोई मिटा नहीं पाए। कम से कम कुछ काम ऐसे होने चाहिए, जिनसे आप साल का अंत या साल का शुभारम्भ बहुत ही सुंदर, अच्छी भावनाओं के साथ कर सकें।
अपने लिए जिए तो क्या जिए,
तू जी, ए दिल ! जमाने के लिए!

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