सत्ता पान का पत्ता

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सत्ता पान का पत्ता

बकरी खाती है पत्ता

पर राजनीति न करती
अपने हिस्से का मेहनत से चबाती
पर नेता चबा जाता है
चारा
स्पेक्ट्रम
बैंक
कोयला
तोप
अनगिनत चीजें ।
पचाता है
डकारता है
कभी खराब नहीें होता उसका पेट
हर पांच साल के बाद कुछ दिन
जनता के नाम रखता है व्रत
मजबूत हो जाता  है
उसका पाचनतंत्र
उसका आहारनाल हर बार बढ जाता
लीवर बखूबी देता साथ
मिलकर काम करना
हर घोटाले को घोट जाना
जानता है पचाना ।
हर बात से इनकार करता
उसका दिल व दिमाग
बचाता उसे
जानते हो कैसे?
उसका पाचनतंत्र है  मजबूत
दिमाग व दिल को
मिलता है
उनकों उनका घोटाले वाला हिस्सा।

अभिषेक कांत पाण्डेय

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About the Author:

शिक्षा— पत्रकारिता एवं जनसंचार में इलाहाबाद विवि से परास्नातक, फोटोजर्नलिज्म एंड विजुअल कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा, शिक्षा में स्नातक, केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा उतीर्ण, कंप्यूटर में सर्टिफिकेट कोर्स। अनुभव— विभिन्न अखबार व मैग्जीन में संपादकीय सहयोग, एनजीओ में मीडिया एडवोकेसी, पत्रकारिता एवं अन्य विषयों में अध्यापन, न्यू इंडिया प्रहर मैग्जीन में समाचार संपादन कार्य। विभिन्न सम्मानित पत्र—पत्रिकाओं में कविता व लेख, स्वंतत्र लेखन, वेब व पोर्टल पर विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर सक्रिय लेखन।

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