नोट बंदी

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नोट बंदी

By |2019-01-06T17:17:02+00:00January 6th, 2019|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

नोट कर लो
ये नोट
वक्त के साथ
आपका साथ छोड़ जाता है,
वक्त चाहे जितना हो
एक दिन वो भी खत्म हो जाता है।

अगर रह जाता है तो वह तुम
पर वह तुम में मैं नहीं रह पाता।
तुम समझ पाते हो
कैसे फर्क पड़ता है उन लोगों पर।
कुछ वक्त पहले तुम
काली तिजोंरी में
झांकते थे इठलाते थे,
जाने कितने इंसानों का मार हक
बंद था तुम्हारी तिंजोरी में,
नोटों की शक्ल में काली करतूत।

वक्त आज एक है
नोट अनेक
पर सब मिट्टी के ढेर।
सोचो जानो
एक बार फिर पढ़ लो
महावीर, गौतम को
क्या पता चले तुम
माया में जोड़ रहे हो नोट
कहीं हक मार रहे हो
कई जिंदगियों का।

काले तिंजोरी में कैद
उन नोटों को मिली अजादी
जिसे तुमने कामाया तिकड़म से।
फिर वक्त आ गया
तुम्हारी तिंजोरी में काली कमाई
वाली नोटे
साथ में रखी उन बेनामी कागजों
को भी क्रांति सिखा गई
अब वे कागज तुम्हारे
खिलाफ है!

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About the Author:

शिक्षा— पत्रकारिता एवं जनसंचार में इलाहाबाद विवि से परास्नातक, फोटोजर्नलिज्म एंड विजुअल कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा, शिक्षा में स्नातक, केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा उतीर्ण, कंप्यूटर में सर्टिफिकेट कोर्स। अनुभव— विभिन्न अखबार व मैग्जीन में संपादकीय सहयोग, एनजीओ में मीडिया एडवोकेसी, पत्रकारिता एवं अन्य विषयों में अध्यापन, न्यू इंडिया प्रहर मैग्जीन में समाचार संपादन कार्य। विभिन्न सम्मानित पत्र—पत्रिकाओं में कविता व लेख, स्वंतत्र लेखन, वेब व पोर्टल पर विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर सक्रिय लेखन।

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