एक कहानी

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एक कहानी

By |2019-01-06T17:12:17+00:00January 6th, 2019|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

एक कहानी
लिखने से पहले
वे संबधों के बीच तैरे थे
उस रात,
डूबे रहे सुबह तक।
अब सुबह लिख रहे हैं।
एक कहानी
सेक्स, क्राइम में
एक लड़की
उसकी जिंदगी के हिस्से
फाड़ रहे थे पन्ने
संवेदना के गाढ़े अक्षरों में
छिपा रहे थे
नैपथ्य का सत्य।
स्वयं को व्यक्त कर रहे थे,
बलात्कार, हिंसा
उछलते शब्दों को
कोस रहे थे समाज को।
अश्लीलता का जाल
साहित्य में सीधे—सीधे
फैलने से उनका लेना देना नहीं
नब्ज टटोल चुके थे—
बेचने के अर्थशास्त्र में
उतार रहे थे कविता कहानी
मन से,
बदलते चेहरों मे शामिल
पलभर में अंदरखाने में
खेल रहे थे हाड़मांस से।
सच नैपथ्य में,
जनता सच ढूंढ रही थी।

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About the Author:

शिक्षा— पत्रकारिता एवं जनसंचार में इलाहाबाद विवि से परास्नातक, फोटोजर्नलिज्म एंड विजुअल कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा, शिक्षा में स्नातक, केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा उतीर्ण, कंप्यूटर में सर्टिफिकेट कोर्स। अनुभव— विभिन्न अखबार व मैग्जीन में संपादकीय सहयोग, एनजीओ में मीडिया एडवोकेसी, पत्रकारिता एवं अन्य विषयों में अध्यापन, न्यू इंडिया प्रहर मैग्जीन में समाचार संपादन कार्य। विभिन्न सम्मानित पत्र—पत्रिकाओं में कविता व लेख, स्वंतत्र लेखन, वेब व पोर्टल पर विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर सक्रिय लेखन।

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