होंठों पर कुछ तो आँखों में कुछ और,
दिल में कुछ और दिमाग में कुक और,
क्या कहें! इनकी फितरत है कुछ और…
तारीफ तो करें आपकी आपके सामने,

मगर बुराई करें, कोसे पीठ पीछे,
आपसे मिले वोह बड़े हमदम बनकर,
और साजिशे रचे, छुरा घोंपे पीठ पीछे,
हाथी के दांत हैं पैने खाने के और दिखाने के और….

मुख पर तो करें हाँ जी! हाँ जी! ज़रूर ज़रूर,
जैसे आपके समर्थक / अनुगामी हों बड़े,
मगर नज़र फेरते ही यह करने लगे मनमानी,
कहने को तो ”अपने’ मगर है यह विरोधी बड़े .

कैसे समझिएगा आप इन्हें? इनकी असलियत है कुछ और…
देखे होंगे आपने सिनेमा में बड़े-बड़े अदाकार,
मगर इनसे मिलिए, यह भी अदाकार से कम नहीं,
बातें करेंगे बड़ी मीठी-मीठी दिलफरेब, दिलकश,

क्या यह खालिस शहद के बने हैं, जी नहीं!
जज्बातों से खेलने वाले बाज़ीगर हैं यह, नहीं कुछ और..
कहके तो देखिये इनसे दिल का हाल,
नहीं! नहीं मत कहियेगा इनसे रो-रो कर अपना हाल,

आपके दर्द भरे फ़साने का यह अखबार बना देंगे,
आज जो सुन रहे हैं आपकी आहों से अपनी आहें मिलाकर,
कल इन्हें आहों का मज़ाक बना देंगे.
भरोसा न करना कभी, यह आपके राजदार नहीं, यह है चोर.

सफ़ेद धुले हुए कपड़ों की कई तहों में छुपी है फितरत इनकी,
नहीं पकड़ सकते इनका झूठ आप, यह आइना भी नहीं, न है यह खुली किताब,
इन इंसानों की भोल सूरत के पीछे एक शैतानी सूरत है कुछ और…

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