मासूम लड़की

मासूम लड़की

वो बचपना शरारतें गुस्ताखियां शायद कम हुई होंगी।
वो इश्क़ वो अदाएं वो बेचैनियां शायद कम हुई होंगी।

बदल तो गयी है बहुत वो दूर होकर मुझसे पर ।
गुजरती होगी बाग से तो कलियां अब भी खिलती होंगी।।

सादगी है उसके बदन पर,गजाल सी आंखे है ।
फिर भी निगाहे उसकी अब भी दिल चीर देती होंगी।।

उसका मुस्कुराना तो आज भी याद है मुझे पर ।
वो हँसती होगी अब भी तो बहार आ जाती होगी।।

यूँ तो इश्क था उसे मुझसे पहले भी बहुत पर ।
शायद मेरी याद अब भी उसकी आंखे भर देती होंगी ।।

उसकी जुल्फों को अपनी उँगलियों से संवारा है मैंने ।
उसकी लटकनें अब तो खुद ब खुद संवरती होंगी।।

उसका चेहरा जो मुझे देखकर खिलखिला जाता था ।
शामो सहर अब तो उसपर भी उदासी छाई होगी।।

ये मुमकिन नही कि मुक्कमल हर इश्क़ हो जाये ।
हाँ! वो आज भी सीसे में मुझे देखकर मुस्कुराती होगी।।

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