मेरी कलम

मेरी कलम

मेरी कलम है प्यासी काफी है
स्याही मुझे ज़रा सी काफी है

आगाह ना करा कर लफ़्ज़ों से
महफ़िल में तेरी खाँसी काफी है

शेर बोलने की वजह नही चाहिए
इक सूरत की उदासी काफी है

और कुछ न करो मेरे वास्ते तुमने
मेरी तन्हाई है तराशी काफी है

मुझे निकाल दिया दिल से मग़र
दिल की ले ली तलाशी काफी है

ये धूल उसकी तस्वीर पर ‘रगी’
हो के बैठी है बासी काफी है

‘रगी’

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