प्रकृति ने एक नन्हा बीज बोया
जो अंकुर बनकर खिलेगा
कली खिलेगी, खुश्बू उड़ेगी
विधाता बहुत खुश हो रहा था
विश्व की एक अनमोल धरोहर
एक मासूम कन्या को बनाकर
पर हाय रे मानव, इतनी निष्ठुरता
कली खिलने से पहले ही तोड़ दी
जबकि नारी जननी है सृष्टि की
नारी शक्ति है, ममता है
क्यों तूने ऐसा अनर्थ किया
अपनी जननी का अपमान किया
इतिहास क्या तुझको माफ़ करेगा
 क्या नारी बिन ये जग रहेगा
जब समय चक्र रुक जायेगा
तब एक तूफान आएगा
मत तोड़ो प्रकृति का नियम
फूलो से छीनो मत शबनम
बेटी को दुनिया में आने दो
नन्ही कली खिल जाने दो

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