सेना के सम्मान में, उन शहीदों की शान में,
कुछ शब्द बयां करता हूँ उन वीरों के मान में|
करता हूँ मैं धन्यबाद इस रणभूमि के शेरों का, 
जो ढाल बन कर खड़े हैं, लेते हमला गैरों का|
कारगिल के पर्वत पे यूँ तैनात रहते हो,
हाड़ गलाने वाली सर्दी हँसते हुए फिर सहते हो|
सीने पर हर गोली यूँ हंस कर खा लेते हो, 
सीमा पार के हर दुश्मन को फिर दूर भगा देते हो|
ऐ मातृभूमि के मेरे रक्षक तुझको नमन मैं करता हूँ,    
खुद को करके नतमस्तक मैं तेरा बंदन करता हूँ| 

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