न तू गलत न मै सही

न तू गलत न मै सही

न तू गलत न मै सही
ये तो वक्त की साजिशें थी
कि दूरियां हो गई…

गलतफहमी का धुँआ जब छटेगा
तब सब कुछ साफ साफ दिखेगा
और फिर मै मै न रहुँगा
और तु तु न रहेगा
कुछ बोझ बाकी रह जायेगा सीने पे
जो फिर कभी न हटेगा…

साथ होकर भी साथ न होंगे
पास होकर भी पास न होंगे
जज्बात होकर भी जज्बात न होंगे
जो मिले थे धोखे बेशक उनके
एहसास तो होंगे…

तेरी मेरी कहानी का
यही अंजाम था होना
पत्थर का दिल था
फिर क्या है रोना…

न तू गलत न मै सही
ये तो वक्त की साजीशें थी
कि दूरियां हो गई…

निखिल कुमार

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