लो आ गया बसंत!

लो आ गया बसंत!

सतरंगी, इंद्रधनुषों से
घिरी हुई हूं मैं,
जब से तुमने,
मुझे मेरे नाम से पुकारा है…
मैं बसंत हुई,
महक रही हूं,
जब से तुमने,
मेरे हाथों को छुआ है…
पतंगों सा उड़ा मन,
खोई सुध बुध,
जब से देखा तुमको,
कैसा ये मन बावरा है…
सुनी सांसों की धड़कन,
जब से तुम्हारी,
चेहरा सुर्ख गुलाल,
मन फाल्गुन हुआ है…
ख्वाबों की दुनिया,
जब से सजाई थी तुमने,
सारा आकाश जगमग,
दिल दिवाली हो रहा है…

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu