तहार रूपवा में चमकता चाँद सजनी,
अपने मुँहवा प’ घुँघटा लगावल करॅ
कहीं लागे ना ज़ालिम नज़र केहुके
कारी अँखियन में कजरा सजावल करॅ
मचे दिल में तबाही, तूफान बन के
ना अइसे रूपवा के बिजुरी गिरावल करॅ
आ के दिल के अन्हारा में चाँदनी करॅ
सजनी हमसे ना तनिको लजावल करॅ
तहार रूपवा में.

No votes yet.
Please wait...