कानपुर नगर के घाटमपुर में भीतरगाँव- साढ मार्ग पर करीब 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित है एक गाँव बेहटा बुजुर्ग | मुख्य मार्ग से लगभग 200 मीटर अंदर गाँव में प्रवेश करते ही स्थापित है भगवान श्री जगन्नाथ जी का मंदिर | विभिन्न इतिहासकारों, शोधकर्ताओं व पुरातत्वविदों के मत हैं कि भगवान श्री जगन्नाथ के इस मंदिर की निर्माण शैली मराठा कालीन है, जबकि मंदिर के गर्भ ग्रह में उपस्थित भगवान श्री जगन्नाथ जी की मूर्तियां, चित्र दूसरी शताब्दी से दसवीं शताब्दी के मध्य की हैं |भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित अयाग पट्ट ( यग्य स्तंभ ) करीब 2000 ईसा पूर्व का है | मंदिर के पास ही एक ऐतिहासिक तालाब भी स्थित है|भगवान श्री जगन्नाथ जी का यह प्राचीन मंदिर पूर्ण रुप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है|
मानसून आने की पूर्व सूचना प्रदान कराता भगवान श्री जगन्नाथ जी का यह प्राचीन मंदिर :- भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर के गुंबद में लगा विशेष पत्थर आज तक अबूझ पहेली बना हुआ है कारण इस पत्थर की विशेषता है कि मानसून आने के लगभग एक पखवाड़ा पूर्व से ही मंदिर के गुंबद में लगे इन पत्थरों से पानी की बूँदे स्वत: टपकने लगती हैं, जोकि मानसून के आने का पूर्व संकेत देती हैं, गाँव में निवास करने वाले कृषक वर्ग मँदिर के गुंबद से मिले इसी संकेत को आधार मानकर जोताई – बोआई का प्रबंध करने में जुट जाते हैं | समय – समय पर पुरातत्वविद व प्रमुख शोध संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा इस प्राचीन व ऐतिहासिक भगवान श्री जगन्नाथ जी का मंदिर का दौरा किया जा चुका है, अपने लंबे शोध अनुभवों के बाद भी शोधकर्ता इस रहस्य को सुलझाने में असमर्थ साबित हुये हैं कि गुंबद में पानी आखिर आता कहाँ से है और यह रहस्य आज दिन तक आश्चर्य का केंद्र बना हुआ है |
सदियों से निकल रही है भगवान श्री जगन्नाथ जी की शोभायात्रा :- बेहटा बुजुर्ग गाँव में सदियों से भगवान श्री जगन्नाथ जी की शोभायात्रा आषाढ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को खूब हर्षोल्लास व धूमधाम से निकाली जाती है, शोभायात्रा में शामिल होने वाले भक्तगण पूरी श्रद्धा व आस्था से नंगे पाँव भगवान श्री जगन्नाथ जी के रथ को पूरे गाँव में घुमाते हैं | यात्रा के दौरान भिन्न – भिन्न जगहों पर भगवान श्री जगन्नाथ जी की शोभायात्रा का स्वागत, पूजन व प्रसाद वितरण किया जाता है |

No votes yet.
Please wait...