यूँ सूरज बन के निकला है,
लगा कर होंठों पर लाली।
थोड़ा इठलाया व बलखाया,
और हद से ज़्यादा शर्माया।
कहा मैं लेने आया हूँ ‘पप्पी’
त्वचा हो जाएगी काली।।

– सर्वेश कुमार मारुत

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