कैसे कहूं दर्द दिल का
शब्द भी कम पड़ जाते हैं
वीर जवानो की शहादत पर
दिल में गुस्सा आँख से आंसू बहते हैं
क्यों नहीं ऐसा कानून
जो देशद्रोही को दे दंड तुरंत
क्यों मेरे देश में देशद्रोही रहते है.
कोई क्या समझेगा उस माँ की पीड़ा
जिसके नयन सुख गए पथ की राह निहारते
उस पत्नी की मांग का सिंदूर इन्साफ मांगता
कब तक लहू बहेगा यु ही वीरो का लड़ते लड़ते
कैसे कहुँ दर्द उन परिवारों का
जिनका एक ही वारिस कुर्बान हो गया
देश की लाज रखते
अब वक़्त  आ गया
दुश्मन  को सबक सिखाने का
देश की जनता अब तो चेतो
रहो सतर्क घर के भेदी से
कैसे कहूं ,,

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