वह बारिश भी क्या खूब लगी थी,
जब तुम भीग के मेरे अंग लगी थी
पहले प्यार की शुरूआत थी
दिल से दिल की मुलाक़ात थी
वो बिजलियों का रह रह के कड़कड़ाना
सिमट के तेरा मुझसे फिर गले लग जाना
जन्नतें नसीब को चूमने सी लगीं थी
धडकनें हृदय की झूमने सी लगीं थी
रोमांच की सुखद अनुभूति थी
खुदा की भी वही नियति थी
जब भी बारिश आया करती है
वो मीठे पल याद दिलाया करती है
थम जाये वक़्त वहीं दिल ने यही चाहा था
खो जायें एकदूजे में हमने यही चाहा था

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