घुटता है दम-दम घुटता है

तेरे एहसासों के दामन को पकड़ा
छोड़े सारे वास्ते तु तन्हा ना भटका,
बना कर तुझे ज़िन्दगी हम जी लीये
तु हो गया किसी और का गम ये पी लीये,
तेरी तन्हाई को हमने महफ़िल बना दिया
रग-रग में तुझे बसा दिया…

अब तु बढ गया है आगे
हम पिछे रह गये,
तन्हाई में हमारी हम
और तन्हा रह गये,
तेरी एक रूसवाई से
रूह मेरी सिहर जाती है,
आंखों होती है गिली
और आंसुओं की महफ़िल सज जाती है,

तेरे लिये सारे वास्ते हम छोड़ दिये
अस्तित्व को मिटा खुद पहचान छोड़ दिये,
तेरा‌‌ दुर होते जाना अब बहुत अखरता है
वास्ते बचे नहीं कोई हर वक्ता तन्हा सा लगता है…

घुटता है दम-दम घुटता है

Deepak_UD

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