फौजी की रूह
जिस्मके तो चिथड़े कर दिए  है। अब बस चेहरे पर आंसू के छींटे ही रह जाएंगे।
याद करते थे यह सोच कर कि जल्द लौट आएंगे। पर यह तो कभी सोचा ही नहीं था कि अब बस मेरे यादें ही रह जाएंगे।

मौत भी देखो कैसी आई कि जिंदगी को तो क्या अपने-आप को तक अलविदा ना बोल पाए।
हां आखरी बार अपने परिवार को तो तसल्ली से ना मिल पाए। अब बस इतनी ही तसल्ली रह जाएंगी हमारी रूह को कि कम से कम काम तो ऐसा किया कि हमारे कफन पर तिरंगा लपेट पाए।

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