आज बहुत थक सा गया हूँ
ना जाने कितने रूप में
छाँव में और धुप में
पहन पहन कर
बदल बदल कर
अपनों में ही खो गया हूँ
पागल सा मै हो गया हूँ
अब तो मै क्या हूँ
और था मै क्या पहले,
कुछ भी तो याद नहीं है
दुनिया के इस रंग मंच पे
कितने किरदारों का
चोला मैंने पहना है
नित नई कहानी नया सबेरा
नया मुखौटा पहना है
आज लौटना चाहा अपने
असली वाले चोले  में
लौट न पाया यही रह गया
अपने बनाये झमेले में
कभी देखता मै आईने में
तो देख के उसमे इस चेहरे को
पता नहीं ये कौन है कैसा
किसका नया ये जामा है
मेरा चेहरा कैसा था
अब तो यह भी याद नहीं
जैसे रेतों के भव्य इमारत
की कोई बुनियाद नहीं

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