चाँद का चेहरा

देखा आज चाँद का चेहरा
कितना प्यारा  चाँद का चेहरा i
नित- नित नए रूप में आता
सबके मन को हरदम भाता
कभी बड़ा बन कर आ जाता
कभी लघु रूप भी अपनाता
बड़ा सलोना चाँद का चेहरा
कितना प्यारा  चाँद का चेहरा ii
बच्चो को भी हरदम भाए
बूढों को वह डगर दिखाए
विरह  की काली रात में भी
अपनों की भी याद दिलाये
ऐसा है ये चाँद का चेहरा
कितना प्यारा  चाँद का चेहरा iii
कभी पतली सी काली रेखा
कभी- कभी  न किसी ने  देखा
कभी गोला कभी वक्र बनाकर
कभी अर्ध में ही जाते देखा
सपनों में है एक  “राज” का चेहरा
कितना प्यारा  चाँद का चेहरा

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Sanjay Saroj "Raj"

हिंदी से स्नातक, नेटिव प्लेस जौनपुर उत्तरप्रदेश कविता, कहानी लिखने का शौक

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